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यह लाइन समाज में मौजूद आर्थिक असमानता और दोहरे मापदंडों को उजागर करती है। जहां गरीब व्यक्ति कर्ज नहीं चुका पाने पर अपराधी या चोर कहलाता है, वहीं बड़े लोग करोड़ों का कर्ज लेकर भी सम्मानित उद्योगपति कहलाते हैं। यह सवाल उठाता है कि क्या कानून और समाज का नजरिया सभी के लिए बराबर है या नहीं।


